BRICS 2026 की अध्यक्षता करेगा भारत, जयशंकर ने लॉन्च किया ‘नमस्ते’ लोगो
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भारत 2026 में BRICS शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आधिकारिक वेबसाइट और ‘नमस्ते’ लोगो लॉन्च किया।
11 देशों वाला ब्रिक्स समूह दुनिया की करीब 40 प्रतिशत GDP का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे भारत की भूमिका रणनीतिक रूप से अहम हो जाती है।
ट्रंप की टैरिफ नीतियों और वैश्विक तनावों के बीच ब्रिक्स भारत के लिए ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बनने का मंच है।
दिल्ली/ भारत वर्ष 2026 में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने जा रहा है, जिसे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 13 जनवरी को ब्रिक्स 2026 की आधिकारिक वेबसाइट और ‘नमस्ते’ थीम वाला नया लोगो लॉन्च किया। यह सम्मेलन ऐसे समय में होने जा रहा है जब दुनिया टैरिफ युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।
दुनिया के कूटनीतिक मंच पर भारत अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। वर्ष 2026 में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत को सौंपी गई है। इस मौके पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन की आधिकारिक वेबसाइट और ‘नमस्ते’ शब्द से प्रेरित नया लोगो लॉन्च किया। यह लोगो भारत की सांस्कृतिक पहचान, संवाद की परंपरा और वैश्विक सहयोग के संदेश को दर्शाता है।
भारत की मेजबानी में होने वाला यह शिखर सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। अब यह समूह 11 देशों तक विस्तारित हो चुका है और दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और बड़े हिस्से के व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता न केवल प्रतीकात्मक है, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
टैरिफ तनाव के बीच भारत की रणनीतिक भूमिका
वैश्विक स्तर पर बढ़ते आर्थिक तनाव, विशेष रूप से अमेरिका की आक्रामक टैरिफ नीतियों के बीच भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता अहम हो जाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए गए हैं। ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत और रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ जैसी चुनौतियां सामने हैं। ऐसे माहौल में ब्रिक्स जैसे मंच पर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका सामूहिक रणनीति तैयार करने में निर्णायक हो सकती है।
11 सदस्यीय ब्रिक्स समूह वैश्विक आर्थिक संतुलन में अमेरिका-केंद्रित व्यवस्था को चुनौती देने की क्षमता रखता है। भारत इस मंच के जरिए व्यापार, ऊर्जा और वित्तीय सहयोग पर साझा रुख बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज
ब्रिक्स का विस्तार और बढ़ती ताकत इसे ग्लोबल साउथ की सबसे प्रभावशाली आवाज बनाती है। भारत की अध्यक्षता के दौरान विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और समावेशी विकास पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है। भारत पहले भी ग्लोबल साउथ के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाता रहा है, और ब्रिक्स 2026 में यह भूमिका और सशक्त हो सकती है।
बहुपक्षीयता और वैश्विक सुधारों की पहल
दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक असमानता के बीच भारत ब्रिक्स मंच का उपयोग बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की वकालत के लिए कर सकता है। विश्व व्यापार संगठन (WTO), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग भारत की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकती है। यह सम्मेलन बहुपक्षीय सहयोग, संतुलित वैश्विक व्यवस्था और साझा समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
BRICS क्या है और कौन-कौन से देश शामिल हैं?
ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जिसका उद्देश्य आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके मूल सदस्य ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं। हाल के विस्तार के बाद मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हो चुके हैं। 11 देशों का यह समूह वैश्विक आबादी और GDP का बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है, जिससे इसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।